टहनियों के बीच
किसलयों की मुस्कान,
सिर्फ कोमलता, सुंदरता का
प्रकटीकरण ही नहीं होता,
इस मौन , मासूम, सौम्य
भाव में, अंतर्निहित होती है
वनप्रदेश की असीमित भावी
हरियाली और खुशहाली,
इनकी नन्ही बचपन - सी
चपलता में, परिलक्षित होतीं हैं,
समग्र धरा को जीवन देने वाली,
समीर की पांवों की थिरकन,
इनके शैशवपन में,
अठखेलियां कर रही होतीं हैं,
संपूर्ण जीव - जगत को
सूर्य ताप के आक्रोश से,
बचा लेने वाली,एक प्रतिज्ञा,
घनी घनी छांव की,
इनकी लुभावनी चमक से
निकलती हरीतिम आभा,
सूचित करतीं हैं,मानव -मन को,
कि, तुम मेरी रक्षा करके,
स्वयं की,भावी पीढ़ियों की
रक्षा करते हो,
इनकी मखमली मुस्कान
हमें आमंत्रित करती हैं,
कहती हैं कि अपनी
समझ की उंगलियों से
जरा स्पर्श करके तो देखो,
बिसरा दोगे अपनी
सारी क्रूरता, निर्दयता जो
अपनी हृदय में पालकर रखे हो,
किसलय
अपनी सौम्य मुस्कान से
हमारी आत्मा को
प्रेरित किया करतीं हैं -
कि हम एक-दूसरे का अभिनंदन करें।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







