गुजर जाता है ये वक्त
गुजर जाता है ये वक्त एक पहिये की तरह
कहां रुकता है ये वक्त इस पहिये की तरह
रोक पाया नहीं अब तक इस वक्त को कोई
गुजर जाता है वक्त घड़ी की सूइयों की तरह
कब ठहर पाया है कोई इस वक्त के सामने
नजर आता नहीं ये किसी को हवाओं की तरह
गर फिसल गया वक्त किसी के हाथों से कभी
उड़ जाता है, इस आसमां में परिन्दों की तरह
वक्त के साथ जो चला नहीं रह गया अकेला
गर चलना है साथ तो चलो पहिये की तरह
गोल है ये धरा तुम भी अब चलते रहो यादव
वर्ना, गिर जाओगे, थक कर घायल की तरह
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







