कविता : अपना फर्ज....
घर से जब तुम
निकलती हो
हमें देख कर भी अनदेखा
कर चलती हो
किसी हालत में इतने
गलत तो नहीं हम
दो दिन की जिंदगी है कुछ तो
बोलो कम से कम
हम भी तो अपने औकात में
रहेंगे अपना फर्ज निभाएंगे
थोड़ी न तुम्हें झपड
कर तुम को कच्चा चबाएंगे ?
थोड़ी न तुम्हें झपड
कर तुम को कच्चा चबाएंगे.......?
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







