समय बार - बार वार करने पर भी
मैं बार - बार नदी को पार करती हूँ
सुबह से शाम तक नहीं
पूरी जिंदगी कुर्बान करती हूँ
हताश रोके या हसरतें टूटे
फिर पहले दिन से कोशिश करती हूँ
सुबह होना आम बात है
पर मैं नई सुबह के लिए इंतज़ार करती हूँ
मेरे सफर की लंबी उम्र होने पर भी
मंजिल की राह खुद बनाती हूँ
सपने टूटे या आँसू टूटे
में हिम्मत से काम करती हूँ
कली से फूल तक का सफर
बेहतर से बेहतरीन बनाती हूँ
कोई बात नहीं है
मैं अपने लिए एक नई दुनिया रचती हूँ ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







