जीने की बात क्या करें,
मर रहें हैं,कतरा- कतरा
मौत की लंबी राह में
गुजर रहें हैं ,कतरा- कतरा।
उसने बेवफाई तो की
मगर ज़माने के डर से,
कहीं, वो,बिखर न जाए,
डर रहें हैं ,कतरा - कतरा।
खबर उसकी खैरियत की,
हम तक पंहुचता रहे
इसी पल का इंतजार
कर रहें हैं, कतरा -कतरा।
खुद से बगावत करके,
वो,डोली में बैठी है
हम भी खुद से बगावत
कर रहें हैं ,कतरा- कतरा।
जैसे हम जी रहें हैं,
वो, नहीं जी पायेगी
यही सोच सोचकर,हम
सिहर रहें हैं ,कतरा- कतरा।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







