तुम भी मेरे जैसे है कि इंसान लौटकर आएगा,
पर ये तो कहीं जिक्र नहीं कि ज़माने से छूटकर आएगा,
जहां तो बनता बिगड़ता बनने वाला है,
तू पकड़े हुए है अपनी अस्मिता को,
किस जमानत से बचकर जाएगा,
खुदा ही ज़र्रा ज़र्रा छुपाएं बैठा है,
तू किस कला से छुपकर जाएगा।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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