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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

अब तों दिल क़ो आदत हों गई हैं रोज़ के तमाशो की

अब तों दिल क़ो आदत हों गई हैं रोज़ के तमाशो की
हर रोज़ ढ़ो रहे हैं जैसे अर्थी कई उम्मीदों के लाशो की

क़तरा-क़तरा ज़हर उतारा हैं रगों में ऐसे कि मत पूछ
जिंदगी की औकात रह गई जैसे दीवारें हों ताशो की

बची चंद साँसों की मौसीक़ी बड़ी दर्दीली चल रही हैं
तलब हों रही हैं हमको अब मौत के हर एक पाशों की

मुहब्बत हैं तों सही पऱ कभी निभा नहीं सकती जानाँ
तुम तोड़ दो वो पुलिया जो बनी हैं कमजोर रासो की

जगह-जगह बस ज़ुर्म बिखरा पड़ा रहता हैं यूँ कृष्णा
कोई क़ीमत हीं नहीं हैं जैसे किसी की भी साँसों की..
-कृष्णा शर्मा




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

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मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

हर रोज कहीं न कहीं अपराधों का सिलसिला जारी है, इसका दर्द एक सहजमना कवियित्री के हृदय में होना स्वाभाविक है। रचना दिल में तीर की तरह उतरती हुई। क्या बात है 👌👌🙏🙏🙏

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏☺️
सादर प्रणाम ☺️🙏

वन्दना सूद said

बहुत सही लिखा यही है आज की कड़वी सच्चाई

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏
सादर प्रणाम ☺️🙏

Lekhram Yadav said

अब तों दिल क़ो आदत हों गई हैं रोज़ के तमाशो की, बहुत खूब और बहुत खूबसूरत रचना, तमाशों की आदत नहीं है हमें मगर हम खुद तमाशा बन गए हैं
ये गम कहां तक रूलाएंगे
हम तो खुद ही दरिया-ए-गम बन गए हैं, आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏
सादर प्रणाम ☺️🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

बिल्कुल सही कहा आपने अब तों दिल क़ो आदत हों गई हैं रोज़ के तमाशो की..... बहुत बढ़िया 👍🙏 सादर प्रणाम आपको

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏
सादर प्रणाम ☺️🙏

सरिता पाठक said

कृष्णा जी समाज me फैले अपराधों ka सिलसिला ह्रदय को दर्द देता है उस दर्द की टीस कविता को जन्म देती है हम अपने जज्बातों भावनाओ को पटल pr ऊकेर देते हैँ आपके दर्द ne बहुत सुन्दर रचना को जन्म दिया है, लाजवाब, ह्रदयस्पर्शी 👌👌❤️मेरी प्यारी बहन को सादर प्रणाम 🙏🙏

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