दिल में, मैं मासूम ना होता तो दिल धड़कता भी क्या,
जंतु पत्ता होता अगर हर एक शख्स तो कोई महब्बत करता भी क्या,
इशारों से सब बातें हरकतें करने जाते तो कोई इन्तेज़ार करता भी क्या,
जी लगाने में जी चुराने लग जाते तो जी मचलता न तो जी करता भी क्या,
आँखें छुपाकर रखता चेहरा तो काजल खुद को ही नज़रबंद करता भी क्या,
साँसें आबो हवा सूरत से लिपट जाएँ तो होश सम्भाले करता भी क्या,
हुस्न बेपर्दा करने में दिल ए अदब कुर्बान हो जाये तो जानां ये मुसाफिर इससे ज्यादा करता भी क्या,
एक तुम ही अदा रखते हो तुमपे फिदा ना हो तो ये जहां करता भी क्या,
समां सब समन्दर किनारे तुम्हारे लिए ठहरा है बाकी तुम्हें ना ले जाता डूबने को तो लहरों में नैया का साहिल करता भी क्या,
अब रूह फ़ना दर्द जिस्म को अपना नाम ना लुटाए तो खुद को खिदमत के लिए बुलाने पर माहौल में "ललित" ये 'दाधीच' करता भी क्या। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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