कविता: कलयुग में सुख
दिनांक 18/05/2026
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमको और क्या चाहिए।
जिस घर का पुरुष मंदिर जाए तो उस घर में नहीं होती तकरार।
साथ में महिला को ले जाए तो चलती रहे उसकी सरकार।
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमको और क्या चाहिए।
बुजुर्ग बच्चे भी मंदिर जाए तो मिलते रहे सबको संस्कार।
आस पड़ोस और रिश्तेदारों को भी ले जाए तो उसका सुखी संसार।
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमको और क्या चाहिए।
जिस घर में गौ पाली जाए उस घर में संतो का दरबार।
साथ में पशु पक्षी को दाना पानी मिले तो उसके बनते करुणामय विचार।
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमे और क्या चाहिए।
जिस घर में तेल का दिया जले उस घर में होते नित चमत्कार।
जिस घर में अतिथि का होता रहे सम्मान उसके घर पर आते प्रभु बारंबार।
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमको और क्या चाहिए।
जिस घर में नारी का होता रहे सम्मान उस घर में लक्ष्मी का होगा भंडार।
जिस घर में सब मिलकर रहते हो वहा होती सबकी जय जयकार।
सुख शांति धन और प्रेम चाहिए। कलयुग में हमको और क्या चाहिए।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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