""दर्द और ए दिल तू कहाँ नज़र आता है,
वो जिसका कुछ खो गया हो उसे कहाँ नज़र आता है,
वो जो खुद ही बंदिशों में हो,
उसे उसका चेहरा कहाँ नज़र आता है,
याद करता है वो खुद,
खुद से बहुत कुछ करते हुए,
वो कर भी दे तो किसे कहाँ नज़र आता है,
तन्हां उसका ज़िंदा सफर लगा उसे,
वो बांह फैला भी दे तो,
मोहब्बत का तनिक हिस्सा भी उस घेरे में कहां नज़र आता है,
एहसान उसका खुद पे यही था,
वो खुद को ही एहसास कर लें,
बाकी ज़िंदा वो कहाँ नज़र आता है,
ए इरादों ऐब फरेबी काफिरों,
वो खुद को ही खुद ही तव्वजो देने लगे,
पर जमाना ये करने दें ये कहां नज़र आता है,
उसे उसके हिसाब से जीना था,
उसे ये हक़ दे देना ये जहां में कहां नज़र आता है,
कहां नज़र आता है।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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