ईश्वर की एकमात्र सफलता धरती है।
मनुष्य अकाट्य है उसी में जीवन है।
जीवन का सबसे कठिन काम सर्वाइव करना है।
उसे किसी ने नहीं देखा जिसने सबको देखा है।
ईश्वर निरंतर प्रयोग किए होंगे तब जाकर सत रज तम एक जगह स्थिर और गति हुई है।
मनुष्य का ऊपरी हिस्सा सत से, मध्य हिस्सा रजस से और नीचे का हिस्सा तमस से।
मनुष्य के पास ईश्वर का एकमात्र गुण प्रयोग करना है।
जो हमसे प्रेम करता है वही हमें आखिर में मार देता है।
हम अनजान हैं अनजान जगह है और अनजान से हैं इसलिए एक दूसरे पर निर्भर है।
शक्ति, ऊर्जा,गति बिना कुछ नहीं है।
आप सत रज तम वाले हिस्सों को मत बदलो दिक्कत आती है।
तमस गति, शक्ति है, रजस संतुलन और सत और कुछ नहीं सिर्फ होना है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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