जीवन के बिना जीवन
प्रेम होता तो है,पर अधूरा,
दिल रोता तो है पर अधूरा।
जीवन में इन दोनों का मिलन होता है,
तब तक मैं मैं तन्हाई में ही भटकता हूं।
बचपन होता तो है, पर बड़ा वर्ग समझता नहीं,
यहीं तो जीना है,
कर्म करना तो होता तो है, पर परिवेश समझता नहीं जीवन जन का निकल रहा है,,
अब सोचें तो वो पल हकीकत नहीं,
हकीकत जो हो जाएं वहां हमारे लिए जगह कम रह गई,
जीवन ही तो अस्पष्ट है जहाँ स्पष्ट तरीके अपनाए जाते हैं,
जीवन सशर्त हमें रखता है सीमितता का संयोग है,
पर असीमित निशानों से हम इधर उधर के ढहते ढेर को अपने लिए आशियाना बनाते जा रहे हैं,
कौन में अपना अपना मैं छुप गया,
करूं ना करूं में जीवन छिप गया,
कैसे में लक्ष्य अथाह सरिता छुप गई,
क्यों में सम्बन्ध मिलन विग्रह छुप गए,
कहां में अनजान जाने छुप गई,
अब मैं जो चलता रहा यहां तक,
आगे जाने से पहले आपको जीवन की,
आत्म पुकार से दूर कर रहा हूं,
यहां से मैं आगे जा रहा हूं,
जीवन को पीछे छोड़कर,
आप भी राहें अपने लिए रखें।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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