रहेगी उम्मीद-ए-परवाज़ से ही, गुज़र कब तक..
साथ निभाये जाएगी, ये दम-ए-उम्र कब तक..।
इज़हार-ए-मुहब्बत की, आज़माइश तो हो गई..
देखता हूं कि रहेगी, ये आह-ए-बे-असर कब तक..।
वो मेरे मुस्कुराने की, वज़ह पूछते हैं इन दिनों..
उनकी फुरकत में आख़िर रखते भी, चश्म-ए-तर कब तक..।
रातभर से टांक रहा हूं, शब-ए-दामन में सितारे मगर..
आफ़ताब लेकर आयेगा, ये रौशन-ए-सहर कब तक..।
गर मेरे कुछ गुनाह, लायक-ए-मुआफ़ी नहीं तो फिर..
खुदा करेगा फैसला-ए-मुंसिफ़, मुक़र्रर कब तक..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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