Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

जिस दिन हार जाओगे

जिस दिन हार जाओगे

तुम खुद से ही जिस दिन हार जाओगे

इस बेरहम जिन्दगी से कैसे पार पाओगे

बिना सोचे समझे ही, करते रहोगे फैसले

तो बिना लड़े ही जिन्दगी से हार जाओगे

हरा नहीं सकता तुझे शख्स दूसरा कोई

ये हार तब होगी जब खुद से हार जाओगे

तुम सुनना नहीं, जमाने की बात कोई भी

गर जमाने की सुनी तो तुम हार जाओगे

सुनते रहना बात तुम अपने ही दिल की

वरना तुम जीती हुई ये बाजी हार जाओगे

गर बात इस दिल की सुनी नहीं तुमने   

फिर लहरों में घिर कर कहां पार जाओगे

खुद ही करना जिंदगी का हर एक फैसला

गर करते रहे दूसरे फैसले तो हार जाओगे

तुझ को बनना पड़ेगा सहारा खुद अपना

वरना कहां मुश्किलों से तुम पार पाओगे

जीने के लिए कुछ तो करना होगा यादव

वर्ना इन हालात से तुम भी हार जाओगे


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

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आदित्य शेखर 'अनुगूँज' said

आपने आत्मविश्वास, आत्मनिर्णय और संघर्ष की भावना को सहज, प्रेरक एवं प्रभावशाली शब्दों में अत्यंत सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया है—यह रचना पाठक के मन में नई ऊर्जा का संचार करती है। 🌹👏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक शुक्रिया सर

वन्दना सूद said

ये हार तब होगी जब खुद से हार जाओगे👌👌🙏🙏प्रेरणा देती एक खूबसूरत रचना

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद वन्दना जी

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

एक हारे हुए मन को जीतने की राह बताती हुई,ढाढस और हिम्मत की खूबसूरत पंक्तियां, भैया जी, आपकी हर रचना एक शाश्वत कल्याणकारी संदेश भरी होती है। सादर प्रणाम करता हूं 🙏🙏🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद समदिल भाई

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

बिल्कुल सही कहा आपने.. बहुत सुंदर 🙏 सादर प्रणाम आपको

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार

सुप्रिया साहू said

हार हुए व्यक्ति को जीतने की अभिलाषा देती और आत्मविश्वास बनाए रखने प्रेरणा देती यह रचना, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार

कविता बिश्नोई said

यह रचना केवल प्रेरणा नहीं देती, बल्कि मनुष्य के आत्मसंघर्ष और आत्मविश्वास के मूल प्रश्न को भी स्पर्श करती है। सरल भाषा में गंभीर जीवन-दर्शन व्यक्त करना सहज नहीं होता। साधुवाद

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक शुक्रिया मैम आपको सादर नमस्कार

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

आदरणीय भैया जी, आशा है आप सकुशल होंगे। आपकी रचना का इंतजार रहता है, हमेशा की तरह, और प्यार भरी प्रतिक्रिया का भी।आप कैसे हैं। सादर प्रणाम 🙏🌹🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार

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