जिस दिन हार जाओगे
तुम खुद से ही जिस दिन हार जाओगे
इस बेरहम जिन्दगी से कैसे पार पाओगे
बिना सोचे समझे ही, करते रहोगे फैसले
तो बिना लड़े ही जिन्दगी से हार जाओगे
हरा नहीं सकता तुझे शख्स दूसरा कोई
ये हार तब होगी जब खुद से हार जाओगे
तुम सुनना नहीं, जमाने की बात कोई भी
गर जमाने की सुनी तो तुम हार जाओगे
सुनते रहना बात तुम अपने ही दिल की
वरना तुम जीती हुई ये बाजी हार जाओगे
गर बात इस दिल की सुनी नहीं तुमने
फिर लहरों में घिर कर कहां पार जाओगे
खुद ही करना जिंदगी का हर एक फैसला
गर करते रहे दूसरे फैसले तो हार जाओगे
तुझ को बनना पड़ेगा सहारा खुद अपना
वरना कहां मुश्किलों से तुम पार पाओगे
जीने के लिए कुछ तो करना होगा यादव
वर्ना इन हालात से तुम भी हार जाओगे
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







