जो नज़र आ जाये,
कि इस नज़र से,
इस नज़र में देखता हूँ,
उनको,
उनके हाल को,
अपनी आँखों में उतार लेता हूं,
जी लेता हूं उनको,
फिर आगे बढ़ जाता हूँ,
या किसी ओर की तरफ नज़र कर लेता हूँ,
पर बयान नहीं हुआ उनसे,
और वो हमें देखने पर हाल पूछ लेते हैं,
इसलिए ऐसे ही नहीं है परायापन इस दुनिया में कोई,
एक एक अपना अपनापन गुजार के,
नजरों से एक दिन गुज़र, गुज़र ही जाता है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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