झारखंड के कोयले से देश का चूल्हा जलता है
बड़ा अफसोस है झारखंडी का चूल्हा नहीं जलता है
खदाने बढ़ती गई गांव पीछे छूटते गए
मुआवजे के कागज पर पता नहीं कितना मिलता है
कई शहरों के घर में बिजली है रात भर
यहां गांव का एक दिया भी बड़ी मुश्किल से जलता है
जिस मिट्टी के सीने में काला सोना पड़ा है
उस मिट्टी का बेटा रोजी रोटी को तरसता है
जो जंगल आदिवासियों की साँसों का हिस्सा था
उन्हीं जंगलों में ठेकदारों का कुल्हाड़ी चलता है
नौजवान दरवाजे पर नौकरी के लिए बैठा है
पर बिना पैसों के यहां सीट कहां मिलता है
खदानों में पसीना बहाकर उम्र गुजर जाती है
मगर मजदूरों को भर पेट राशन कहां मिलता है
आधा झरिया जल गया जादूगोड़ा भी थम गया
दामोदर स्वर्णरेखा में अब पानी कहां मिलता है
कागज़ पर हर साल तरक्की के फूल खिले
बंजर जमीन पर अब फसल कहां उगता है
कहते हैं झारखंड भारत का रूर प्रदेश है
फिर झारखण्ड के बच्चों का सपना क्यों चूर है
ये कैसी दौलत है जो सबका घर भर देती है
जिसकी जमीन है उसी का घर खाली मिलता है
झारखंड के कोयले से देश का चूल्हा जलता है
फिर झारखंडी को हिस्से में सिर्फ धुआँ क्यों मिलता है
.......सौरव(100₹v) ❤️🖤✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







