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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

🙏जग जननी माँ की ममता🙏

"शीर्षक* 🙏जग जननी माँ की ममता🙏

हे माँ जय माँ हे माँ हे जयति जय जय माँ हे जगत जननी ।
हे माँ अनन्त स्वरूप धारिनी हे माँ अविनाशीनि।।

मैं तो अज्ञानी हूँ मईयाँ - हाँ मैं तो अज्ञानी हूँ ,
आप ही तो मईयाँ महा ज्ञानिनी ।
करहूँ कृपा मईयाँ , हे माँ जगदम्ब भवानिनी ।।
हे माँ जय माँ.......................................।।

(माँ की ममता को माँ ही जानें)2 बिना माँ के उसे कोई ना मानें ना ही कोई पहिचानें
हाँ माईयाँ ना ही कोई पहिचानें ।
हे माँ जगत जननी भवानिनी।।
हे माँ जय माँ......................।।

मन की पीड़ा को मन ही जानें हाँ मईयाँ मन की पीड़ा को मन ही हाँ जानें बिना मन के उसे ना ही कोई जानें ना ही कोई मानें ।
हे माँ जगत जननी कल्यानिनी ।।
हे माँ जय माँ.....................।।

दिन भव चारूँ हाँ रात सा परवारूँ हाँ मईयाँ दिन भव चारूँ रात सा परवारूँ हर दिन हर जगह हर पल मईयाँ मैं तो सिर्फ आपका रस्ता निहारूँ।
हे माँ जगत जननी अविनाशिनी।।
हे माँ जय माँ......................।।

हे कमल नयन मईयाँ मोहि रखिया सदैव अपने चरणों के धूल के छाँव में हां मईयाँ मोहि रखिया सदैव अपने चरणों के धूल के छाँव में अब मोहि नहीं जाना माँ किसी के भी दांव यानि गाँव में ।
हे माँ अम्बे अनादिनी।।
हे माँ जय माँ .....।।

(मन में हो प्यार जब तो और ही क्या कहना)2 हां मईयाँ आपके बिना मुझे अब नहीं रहना हर दिन हर जगह हर पल मईयाँ अब सिर्फ यही है मेरे दिल का कहना हे माँ आनन्द की देवी अनन्त स्वरूपिनी।।
हे माँ जय माँ .........।।

(हे माँ जगदम्बा जय माँ जगदम्बा)2 हां मईयाँ अब करहूँ ना विलम्बा।
हे माँ अनादि अनन्त भवसागर तारिनी।।

हे माँ जय माँ हे माँ हे जयति जय जय माँ हे जगत जननी ।
हे माँ अनन्त स्वरूप धारिनी हे माँ अविनाशीनि।।


(मेरा आत्म-परिचय🙏✍️🙏)
नाम : बाल कवि बाल वैज्ञानिक ठाकुर अभय प्रताप सिंह।
कक्षा : 10th वर्ग B2।
विद्यालय : बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज लखनऊ उत्तर प्रदेश भारत।
माता-पिता : श्रीमती लक्ष्मी सिंह श्री अमित सिंह।
भाई-बहन राजा सिंह परी सिंह।
गाइड-अध्यापक : श्री उमेश कुमार निराला सर जी/श्री प्रवीण कुमार राय सर जी/श्री हरिश्चंद्र सिंह चौहान सर जी
पता : सुहेलिया मजरे सुहेला पोस्ट बकाहुवाँ बाजार थाना सदरपुर विकास-खण्ड महमूदाबाद जिला सीतापुर राज्य उत्तर प्रदेश देश भारत ग्रह पृथ्वी ।
मो०नं०8429372188/tapssarkar2008@gmail.com (मेरा प्रसिद्ध नाम बाल कवि बाल वैज्ञानिक T.A.P.S. Sarkar)




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

रीना कुमारी प्रजापत said

बहुत बढ़िया

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