खोया था मैं, खोता रहा
अपने दिल के आँसू के लिए रोता रहा,
जब मालूम हुआ कि,
अपने यहाँ जिद और जंग भी है,
उस जगह,
साया भी था मेरे पास,
लेकिन इस जगह साया भी सोता रहा,
दुनिया इतने जंजीरों से लिपटी है,
इसके ताले को खोलकर,
मैं बंधनों में होता रहा,
मैं कहीं छुपा नहीं हूं,
यहाँ मुझे देखने वाला ही,
अपनी रूह में खोता रहा। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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