भ्रष्टाचार की अग्नि में,
न्याय व्यवस्था दहक रही है।
भ्रष्टाचारी रिश्वत की बोरियों में,
फाइलों को दबा रहा है।
सरकारी दफ्तरों में,
चंद रिश्वतखोर,
आम जनता को चबा रहे हैं।
शपथ खाकर ईमानदारी की
राष्ट्र को,
जहर पिला रहे हैं।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
भ्रष्टाचार की अग्नि में,
न्याय व्यवस्था दहक रही है।
भ्रष्टाचारी रिश्वत की बोरियों में,
फाइलों को दबा रहा है।
सरकारी दफ्तरों में,
चंद रिश्वतखोर,
आम जनता को चबा रहे हैं।
शपथ खाकर ईमानदारी की
राष्ट्र को,
जहर पिला रहे हैं।
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