वक्त मिला तो उठ गई
प्यारी कलम
ये भी खामोश,परेशान
कुछ ख्यालों को बुनने के लिए
बैचैन बेकरार बेताब बैठी थी
शब्दों के मूल्यवान
हीरे-मोती सोना-चांद
सजाने को
उठ खड़ी हुई प्यारी कलम
दिल-ए-सुकून के लिए
भावनाओं को सजाने
जब-जब कलम उठती है
मन के आंगन में
सुकून के सुमन खिलते हैं
मन के प्रांगण में
न जाने ऐसे कितने
शब्दों के अनमोल
मोती बिखरे पड़े रहते हैं
जिन्हें समेटने में हम इंसान
असमर्थ हो जाते हैं
ये सभी को समेटकर
सुंदर रूप देती है
जज्बातों की सुई बनकर
सभी भावनाओं और
एहसासों को
एक ही धागा में पिरो देती है
अनकहे खामोशी की चादर ओढ़े
लफ्ज़ों को ये ज़ुबान देती है
दिल में दबी हुई अनुभूति को
शक्ति और आकार देती है
दर्द हो,या हो ख़ुशी
सबको इसकी तलाश होती है
दर्द को अपनी स्याही रूपी
मरहम से कम करती है
खुशियों में ख़ुशी का रंग भरकर
जीवन को रंगीन बना देती है और
जिंदगी को उत्सव बना देती है
कलम यूं ही नहीं
ईश्वर का रूप कहलाती है
कलम शक्ति है, ईश्वर है
सुख दुख लिखती है
सब कुछ लिखती है
ये ईश्वर से कम नहीं दिखती
ईश्वर का रूप लगती है
ये सर्वशक्तिमान है
जीवन को मज़बूत
और जिंदगी को
सुदृढ़ बनाती है
सच कहूं,तो यह कलम
सांसों से भी ज्यादा कीमती
नजर आती है
सांसों के बिना तो चंद लम्हें
जिया भी जा सकता है
मगर कलम के बिना
एक पल भी जीना मुहाल है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







