प्रेम में इतनी ईमानदारी तो होनी ही चाहिए । कि जब उस प्रेम कहानी का अंतिम पन्ना पढ़ा जाय!
तब किसी के हिस्से प्रेम करने का पछतावा ना आये।
एक - दूसरे की आँखों में इल्ज़ाम या अपराधबोध नहीं अपितु सम्मान बचा रहना चाहिए।
यदि किसी को गुनहगार ठहराना ही हो तो परिस्थितियां गुनहगार हो प्रेम नहीं, प्रेम नहीं।
_ रत्नप्रिया त्रिपाठी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







