इस दर्द-ए-जिंदगी में जीना सीखा दे कोई,
भटक रही हूँ मैं, मुझे खुद से मिला दे कोई..।।
सुबह की चाय की प्याली, रोज पी ले,
शाम होते ही जाम इश्क़ का गटक ले,
पैर तले धरती खिसक गई, थोड़ा सा और जी ले,
आसमान में इन्द्रधनुष दिखा दे कोई,
भटक रही हूँ मैं, मुझे खुद से मिला दे कोई..।।
अफ़सोस क्या करूं, जमाने से अब,
जिंदगी बर्बाद है, इश्क़ हुआ है तब,
सुख का कतरा-कतरा बिखर गया,
आंखों में चेहरा है तेरा कब तक,
इस तन्हाइयों में जीना सीखा दे कोई,
भटक गई हूँ मैं, मुझे खुद से मिला दे कोई..।।
हर इंसान में मुझे चेहरा तुम्हारा दिखता है,
अब हर लफ्ज़ में नाम तुम्हारा निकलता है,
मैं मिलती नहीं थी उन लोगों से,
जो तुम्हारे बारे में गलत सोचता है,
अब तो दिल करता है रब से मिला दे कोई,
भटक गई हूँ मैं, मुझे खुद से मिला दे कोई..।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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