हो गए ब्याह करते , गुलाम राम जी,
हम रियाया हैं, बीवी निज़ाम राम जी।
चाय की प्याली मांग कर आफत में आ गए,
चिक- चिक को लग रहा नहीं विराम राम जी।
शादी के बाद समझ में इतना तो आ गया,
बीवी की नज़र में हैं सदा नाकाम राम जी
कहते थे दोस्त—"शादी में जन्नत का है मज़ा",
कुरुक्षेत्र- सा हो गया घर धाम राम जी।
रूठीं तो चाय बंद, हँसी बंद, कलाम बंद,
घर में लगा है कर्फ़्य तमाम राम जी।
बोले ज़रा-सा देर से, "ऑफ़िस में काम था",
गिन- गिन कर फिर लगा रही इल्जाम राम जी।
बीवी ने मुस्कराकर जब पूछा कि "कौन थी?"
तब से दिल-दिमाग कर रहा न काम राम जी।
सब्ज़ी में नमक कम हुआ, मौसम बदल गया,
संसद-सा घर में छिड़ गया संग्राम राम जी।
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







