पशु-पक्षी, कीट-पतंगे
कोई जीव नहीं बदला,
एक इंसान है
जो वक्त के हर बदलते मोड़ पर
ख़ुद को बदल देता है।
फिर कहता है कि
वो ज़माने नहीं रहे,
वक्त बहुत बदल गया है।
वक्त तो बदलने के लिए ही आता है,
जिसे ठहरना है
वो इंसान है
पर वो ठहरता नहीं है।
वक्त के साथ कदम बढ़ाना है,
अपनी जड़ों को नहीं काटना है।
संस्कार नहीं बदलना है,
वक्त के बहाव में बहना है
पर ख़ुद को नहीं डुबोना है ।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







