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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

हे इंसान, अब थोड़ा ठहर जाना

पशु-पक्षी, कीट-पतंगे
कोई जीव नहीं बदला,
एक इंसान है
जो वक्त के हर बदलते मोड़ पर
ख़ुद को बदल देता है।

फिर कहता है कि
वो ज़माने नहीं रहे,
वक्त बहुत बदल गया है।

वक्त तो बदलने के लिए ही आता है,
जिसे ठहरना है
वो इंसान है
पर वो ठहरता नहीं है।

वक्त के साथ कदम बढ़ाना है,
अपनी जड़ों को नहीं काटना है।
संस्कार नहीं बदलना है,
वक्त के बहाव में बहना है
पर ख़ुद को नहीं डुबोना है ।
वन्दना सूद


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सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

+

जयश्री विलास जोधंळे said

क्या बात कही है वदंना जी, संस्कार नही बदलना वक्त के बहाव मे बहना है पर खुदको नही डुबोना अति सुदंर

वन्दना सूद replied

🙏🙏😊

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर इंसान ख़ुद हर पल बदलते रहता है। अपनी मौलिकता को कभी नहीं बदलना चाहिए। आपकी कविता प्रेरणा दायक है। सादर प्रणाम 🙏🌹🙏

वन्दना सूद replied

🙏🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! बहुत ख़ूब! बहुत ही सबक़-आमोज़ कलाम! बेहद प्रेरणादायक रचना! लाजवाब लिखा है आपने, वन्दना जी! 👌👌👏👏

वन्दना सूद replied

शुक्रिया sir 🙏🙏

सरिता पाठक said

सही कहा वन्दना बहन आपने वक़्त काम तो बदलना है इंसान ko वक़्त के बहाव me बहना है पर अपनी मौलिकता नहीं खोनी है स्वयं को नहीं डुबोना है अति सुंदर रचना 👌🙏

वन्दना सूद replied

जी बिल्कुल सही कहा आपने

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