हनुमान का विश्वास; उसी पर करें विश्वास।
किसने सोचा कि,
मिलेगा आराम,
सुकून उसको भी,
हनुमान ने रास्ता देखा,
दूरी देखी,
राम की पीड़ा देखी,
जो सीता की आँख में थी,
राम की पीड़ा रामायण में नहीं मिलेगी,
हनुमान के उन कार्यों की होने ना होने के बीच में मिलेगी,
हनुमान के लिए रास्ता बहुत दूर था,
समय कम था,
कार्य अधिक था,
अस्तित्व की बात,
तो सीता की खोज,
जीवन की उम्मीद,
बचाना भाई लक्ष्मण को,
फिर ख़ुद खड़ा करना,
आगे बढ़ना,
अपने आत्मसम्मान के लिए,
शत्रुओं और बाधाओं का दौर था,
रावण भी था,
वो डर भी कुछ और था,
अकेलापन भी था,
चलना खुद को था,
इतनी मंजिलों में अपनी,
मंज़िल तक पहुंचना था,
तो बता भी दो,
हनुमान किस पर विश्वास करते,
काम करना है,
रास्ता लंबा, बीच भरी बाधाओं से,
और अकेलापन खालीपन,
सामने शत्रु,
तो विश्वास जिसके लिए कार्य करना है,
उसी पर करना है,
वो किया हनुमान ने,
ऐसे ही हम सब काम करते हैं,
इस धरती पर,
तो जिसके लिए सब मिलके कर रहे,
उसी पर करें विश्वास।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







