सपनों का संसार कोई मृगतृष्णा नहीं,
यह आत्मा की गहराइयों में जन्मा सत्य है कहीं।
जहाँ विचार बीज बनकर चेतना में उतरते हैं,
और पुरुषार्थ की धूप में भविष्य रचते हैं।
हर सपना एक प्रश्न है स्वयं से किया हुआ,
हर संघर्ष उसका उत्तर—समय से लिया हुआ।
जो टूटकर भी निखर जाए, वही स्वप्न महान,
जो अँधेरों से टकराए, वही बनता पहचान।
सपने सोने नहीं देते, जगाते रहते हैं,
भीतर के भय को चुनौती सिखाते रहते हैं।
जो सीमाओं को लाँघने का साहस भरते हैं,
वही सपने इतिहास की धारा बदलते हैं।
मत पूछो कि सपना कठिन क्यों होता है,
कठिन इसलिए—क्योंकि वही सत्य होता है।
जो आसान राह चुन ले, वह भीड़ में खो जाता है,
जो सपना चुन ले, वही स्वयं को पा जाता है।
इसलिए स्वप्न देखो, पर आँखों से नहीं,
स्वप्न जियो—अपने कर्मों की रोशनी से सही।
क्योंकि सपनों का संसार बाहर कहीं नहीं,
अखिल तुम्हारे भीतर है—और वहीं से शुरू सही।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







