नाश हो अब द्वंद का ,
दिल हुआ ये मृदंग सा,
रोम रोम में स्पंद सा,
रुदन है आनंद का,
ये रुदन है आनंद का ।। १ ।।
क्षीण बुद्धि तन मंद सा,
देखकर मैं दंग था,
जन्म है उमंग का,
रुदन है आनंद का,
ये रुदन है आनंद का ।। २ ।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
नाश हो अब द्वंद का ,
दिल हुआ ये मृदंग सा,
रोम रोम में स्पंद सा,
रुदन है आनंद का,
ये रुदन है आनंद का ।। १ ।।
क्षीण बुद्धि तन मंद सा,
देखकर मैं दंग था,
जन्म है उमंग का,
रुदन है आनंद का,
ये रुदन है आनंद का ।। २ ।।
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