रात गुजर जाने का भी गम नहीं होता
मेरा ये दर्द , क्यों कुछ कम नहीं होता
ठहराव अश्क़ो का भी सही नहीं जानाँ
पूरी रात रोकर तकिया नम नहीं होता
तेरी बाहों में खो कर रोना है एक दफ़ा
पर इतना कहने का भी दम नहीं होता
तू नहीं समझेगा तो कौन समझेगा बता
हर कोई शख्श जानाँ हमदम नहीं होता
चोट देकर कृष्णा को मरहम दिखाते हैं
हर हल्दी का लेप तो मरहम नहीं होता...
- कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







