याद आया कोई मिसरा, ग़ज़ल कहने लगा,
मैं टूट कर जब बिखरा, ग़ज़ल कहने लगा।
जो दर्द दिल में चुप था, लबों पे आ गया,
आँखों से जब ये उतरा, ग़ज़ल कहने लगा।
लगा के ज़ख्म पे मरहम वो बार-बार छूता,
ज़ख्म फिर से हुआ हरा, ग़ज़ल कहने लगा।
मैं हँस रहा था ऊपर से, दुनिया के सामने,
अंदर एक शख़्स उभरा, ग़ज़ल कहने लगा।
कुछ इस तरह से रात ने बाँहों में ले लिया,
जब चाँद तन्हा-सा ठहरा, ग़ज़ल कहने लगा।
लफ़्ज़ों में ढल रही है, मेरी हर एक बेबसी,
ये दिल दर्द से जो भरा, ग़ज़ल कहने लगा।
उसकी यादों ने अब तक सँभाले रखा मुझे,
हुआ जब भी मैं बेआसरा, ग़ज़ल कहने लगा।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







