पाँच उँगलियों के पकड़ने से ही...
उनके खाली होने की संभावना बढ़ जाती है।
जितना वे पास आती हैं,
उतना ही 'न होने' का डर गहरा होता जाता है।
क्योंकि उनके पास वह एक चीज़ थी—
किसी की 'दूरी' के बीच की 'नज़दीकी'।
एक ऐसा बिंदु...
जहाँ पकड़ने में सोचना नहीं था,
बस हो जाना था।
मगर उस 'थोड़ी' सी जगह में,
जहाँ सच को ठहरना था,
एक 'ख्याल' ने अपनी जगह घेर ली।
एक छोटे से विचार ने सारा विस्तार हथिया लिया।
और बस...
हाथों से वह वास्तविकता का अवसर छूट गया।
सब कुछ हाथ में था, पर कुछ न रहा।
पाँच उँगलियाँ—
बस अपने ही खालीपन की गवाह बनकर रह गईं।।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







