जब तलक चुप रहे,सहते रहे,निभाते रहे,
वो हमें झुकाते गए,
हम झुकते रहे
जब कमर झुकने का दर्द न सह पायी
तब हम बोल पड़े
कड़वा सच कोई सुन न सका
इसलिए हम खुदगर्ज़ कहलाए
लेकिन हम उनकी हकीकत जान कर मुस्कुराए
क्योंकि अब हम भी समझदारों की महफ़िल के सिकन्दर बन गए..
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







