दुनिया
पहले इतनी बुरी नहीं थी।
बुराई हमेशा थी,
पर उसे
छिपना पड़ता था।
आज
भलाई सफ़ाई देती फिरती है,
और बुराई
सम्मान के साथ मंच पर बैठती है।
झूठ
इतने आत्मविश्वास से बोला जाता है
कि सच
अपने ही शब्दों पर
शर्मिंदा हो जाता है।
ईमानदार आदमी
अब मूर्ख कहलाता है।
और बेईमान,
व्यवहार-कुशल।
लोग
रिश्ते नहीं निभाते,
रिश्तों का उपयोग करते हैं।
चेहरों पर मुस्कान होती है,
मन में हिसाब।
हर आदमी
दूसरे को
सीढ़ी की तरह देखता है।
ऊपर पहुँचते ही
वह पीछे मुड़कर नहीं देखता।
दुनिया का सबसे बड़ा परिवर्तन
यह नहीं कि
इमारतें ऊँची हो गई हैं।
सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि
मनुष्य का कद
धीरे-धीरे
उसके ही भीतर
छोटा होता गया।
और एक दिन
इतना छोटा हो जाएगा
कि उसे
अपने ही अंतःकरण में
खड़े होने की जगह भी नहीं मिलेगी।
— सुरेन्द्र कल्याण बुटाना


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







