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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

दिल-नशीं सफ़र में

रूठ गए मुझसे कितने ही हसीं लोग
इस दिल-नशीं सफ़र में,
नामी-गिरामी बनने की
इस ज़िंदादिली जद्दोजहद में।
ना पनपा कभी कोई स्वार्थ दिल में
ना किया कभी कोई फरेब मैंने,
पर छीन गया हर कोई मुझसे
एक वादा पूरा करने में।

पहले बने वो परम मित्र
फिर चुपके से छोड़ दिया,
खता नहीं थी मेरी कुछ
फिर भी मुझसे मुँह मोड़ लिया।
अब पहले सी रौनक दिखती नहीं
किसी भी रिश्ते में,
पता नहीं क्यों इन रिश्तों ने
फिर अजनबी रुख लिया।

पूछते हैं हम, वो बताते नहीं
पर जानते हैं वो हमें अहंकारी समझ बैठे,
उनकी विरासत को संभालने में
कुछ लोग हमें स्वार्थी समझ बैठे।
दोस्त समझे नहीं, दोस्त होके,
दोस्त का हाल-ए-दिल,
और अंकुश लगा इस बंधन पर
हमें फरेबी समझ बैठे।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत ✍️




यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (11)

+

Lekhram Yadav said

न जाने क्या हुआ तुम्हारी इस बात से
मिला कुछ भी नहीं इस मुलाकात से
नहीं है मंजूर किसी को, सरपरस्ती ये तेरी
हकीकत जान लो ये तुम हमारी बात से
कोई कहता है हमसे कि अनुभवहीन हो तुम
दूर रहते हैं वो खफा हो कर इसी बात से
हकीकत उनको लेकिन नहीं मालूम है ये
चलती नहीं है ये दुनियां किसी के जज्बात से
लिखा है तुमने जो भी वो सब हम जानते हैं
वो अन्जान है सब तुम्हारे दिल की बात से
करो मजबूत खुद को ये तुमसे कहता है यादव
जीत पाओगे तभी तुम मुश्किल हालात से

रीना कुमारी प्रजापत replied

Ji samjh gye bahut bahut shukriya aapka sabhi ke dil ki baat jo hum jante the aaj confirm ho gai..... Itni acchi samiksha pakar bahut khushi hui.... Sadar pranam aapko🙏🙏

पवन कुमार "क्षितिज" said

कविता अपनी कहानी समझने में कामयाब होती प्रतीत हो रही है..कुछ उलझने भी हैं मगर वो भी दिल को भा रही है...

रीना कुमारी प्रजापत replied

बहुत बहुत धन्यवाद आपका🙏 सादर प्रणाम आपको

पवन कुमार "क्षितिज" said

समझने को समझाने माना जाए

रीना कुमारी प्रजापत replied

Ji

वन्दना सूद said

हर किसी का अपना नज़रिया होता है इसलिए अपना काम करो और मस्त रहो 😊

रीना कुमारी प्रजापत replied

जी बिल्कुल सही कहा आपने 🥰🥰

सुभाष कुमार यादव said

बहुत सुंदर रचना।👌👌🙏🙏

रीना कुमारी प्रजापत replied

आभार आपका🙏

ललित दाधीच said

क्या बात है, क्या लिखा है, अद्भुत, आप स्वयं सक्षम हो, प्रेम सबसे नहीं होता, प्रेम बहुत सँकरा रास्ता है वहां से आप दोनों मिलकर निकलो, दोनों के भीतर और बाहर संतुलन रखो, बाकी अभी अपने जीवन का जो लक्ष्य है उसपर काम करो!! बाकी मस्त लिखा ❤️❤️ जे बात ❤️ ♥️

रीना कुमारी प्रजापत replied

जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

हृदय को अंदर से छू लेने वाली रचना 👌 एक ऐसी पीड़ा जो अपनो के बेरूखी से आती है। अगर ये कविता आपबीती है तो अपनी मौलिकता सशक्त बनाए रखिए 🙏🙏🙏

रीना कुमारी प्रजापत replied

जी आभार आपका 🙏

तुलसी पटेल said

जज्बातों को बयां किए जा रहे है आप लेकिन हमें बात अधूरी सी लगी।।

रीना कुमारी प्रजापत replied

😅😅🥰🥰🥰❤️❤️

सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह.....आप अपना वादा पूरा कीजिए, जो रूठे हैं कभी न कभी उनको भी समझ में आएगा आप गलत नहीं हैं, जो अभी अजनबी सा व्यवहार कर रहे हैं वो भी समझ जाएंगे, आप अहंकारी नहीं हैं बल्कि दयालु हैं, और हम आपके साथ है कभी कहीं नहीं जाएंगे, अंतर्मन में उठ रहे सवालों को बखूबी लिखा है आपने, बहुत खूबसूरत रचना दीदू 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

रीना कुमारी प्रजापत replied

जी शुक्रिया आपका

कमलकांत घिरी said

वाह दीदी जी क्या कहने मगर आपसे कोई नहीं छीना गया है दीदी सभी आपके साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में सदैव ही साथ खड़े हैं, हां ये बात है कि कोई अपनी मौजूदगी अभी जाहिर नहीं कर रहे होंगे लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि वो आपकी परवाह नहीं करते, नहीं वो आपको कभी भूले थे, बहुत खूबसूरत, भावविभोर करने वाली रचना👍🙏🙌👌आपको मेरा सादर प्रणाम

रीना कुमारी प्रजापत replied

Bahut bahut dhanyawad aapka

सत्यवीर वैष्णव said

बहुत सुंदर प्रस्तुति बेहतरीन पहले बने वो परम मित्र
फिर चुपके से छोड़ दिया,
खता नहीं थी मेरी कुछ
फिर भी मुझसे मुँह मोड़ लिया।
अब पहले सी रौनक दिखती नहीं
किसी भी रिश्ते में,
पता नहीं क्यों इन रिश्तों ने
फिर अजनबी रुख लिया। उम्दा बहुत अच्छा लगा

रीना कुमारी प्रजापत replied

आभार आपका 🙏 सादर प्रणाम

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