धूप का सफ़र लंबा है, पाँव मगर रुकते नहीं,
हालात चाहे जैसे हों, हौसले तो झुकते नहीं।
रोज़ ठोकरें मिलती हैं, रास्ता कठिन होता है,
फिर भी अपने सपनों से, हम कभी भी छूटते नहीं।
दर्द ने सिखाया है, मुस्कराना चुपचाप,
आँसू आँख में रहते हैं, होंठ मगर टूटते नहीं।
संघर्ष की इसी आग में, प्रेम भी पला है,
बिना तपे रिश्ते, सोना बनकर ढलते नहीं।
भीड़ लाख मिल जाए, फिर भी मन अकेला है,
सच्चा प्रेम हो जब साथ , सन्नाटे भी चुभते नहीं।
हार कर जो बैठ जाए, वह मंज़िल क्या पाए,
धूप में जो चलता है, वही घर से कटते नहीं।
जीवन की इस राह में, सीख यही मिली है,
दर्द और प्रेम के बिना, लोग पूरे बनते नहीं।
धूप का सफ़र कहता है, सच को थामे रहिए,
कह गए हैं अखिलेश, सपने यूँ ही मरते नहीं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







