हास्य -व्यंग्य
दिखावा
डॉ. एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
जेब में मोबाइल डेढ़ लाख का, और खाते में सन्नाटा है,
दिखावे की इस दौड़ में, हर कोई आज चांटा है।
किश्तों पर आई है गाड़ी, और किश्तों पर ही जूते हैं,
बाहर से हैं नवाब हम, पर अंदर से बिलकुल टूटे हैं।
मैकडॉनल्ड्स में बैठकर हम, बर्गर की फोटो खींचते हैं,
भले ही घर में भूख से, हम अपनी आँखें मींचते हैं।
पहनकर ब्रांडेड शर्ट, हम वीआईपी बन जाते हैं,
पर बिजली का बिल भरने में, पसीने छूट जाते हैं।
क्रेडिट कार्ड का कर्ज़ा है, और चेहरे पर मुस्कान है,
दिखावे के इस बाज़ार में, बस खोखली ही शान है।
शादी में भी उधार लेकर, हम हाथी-घोड़े लाते हैं,
और फिर सालों तक हम, बस रूखी रोटी खाते हैं।
लाइफस्टाइल के चक्कर में, हमने सुकून को बेच दिया,
अपनी असली हस्ती को, झूठ के कफ़न में खींच दिया।
पड़ोसी की बड़ी कार देख, हमारा बीपी बढ़ता है,
दिखावे का ये ज़हर, रग-रग में धीरे चढ़ता है।
खुद को बड़ा दिखाने की, ये कैसी मजबूरी है,
पर सच तो ये है कि, सादगी ही सबसे ज़रूरी है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







