नववर्ष पर रचित कविता ‘चलो नया संकल्प करें’ जीवन को नई दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती है।
"चलो नया संकल्प करें"
वक्त की लहरों पर बहकर,
देखो एक साल और गया,
अनगिनत यादें दे गया,
कुछ हँसाकर तो कुछ रुला गया।
पर जो बीत गया वो कल था,
अब नया सवेरा आया है,
किस्मत की कोरी चादर पर,
लिखने का वक्त फिर आया है।
मत देखो कि क्या खोया है,
देखो क्या पाना बाकी है,
मंजिल तक जाने के लिए,
अब कितना चलना बाकी है।
गिले-शिकवे सब धो डालो,
नफरत की आग बुझा डालो,
रूठे हुए जो अपने हैं,
उन्हें गले से आज लगा डालो।
नया साल बस तारीख नहीं,
एक नया अवसर होता है,
सोए हुए अरमानों का,
एक नया मंजर होता है।
मेहनत का हाथ थामकर,
सपनों को उड़ान देनी है,
अपनी मेहनत से इस दुनिया में,
अपनी नई पहचान देनी है।
अभिषेक! दुआ करे ऐसी,
सब स्वस्थ रहें और खुशहाल रहें,
दुख का साया छू न सके,
मंगलमय ये साल रहे।
प्रभु की कृपा का हाथ रहे,
और भक्ति का साथ रहे,
हर दिन एक नया उत्सव हो,
हर पल खुशियों की बात रहे।
लेखक: अभिषेक मिश्रा 'बलिया'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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