चाहत
तुझे ही चाहने की चाहत रखता हूँ मैं,
सब खोकर भी तेरी ही चाहत रखता हूँ मैं।
मेरा अपना है क्या, जो सबको बाँट लूँ मैं,
फिर भी ये जहां पाने की चाहत रखता हूँ मैं।
पागल, दीवाना, आवारा क्या नहीं कहते मुझे,
हर बात सहने की आदत रखता हूँ मैं।
दुनिया चाहे जो कहें, मुझको कोई ग़म नहीं,
तेरी यादों की ही इबादत रखता हूँ मैं।
चाहे तू स्वीकार करे या इंकार करे मुझे,
तुझसे मिलने की अब भी हसरत रखता हूँ मैं।
तू मिले या न मिले, ये तेरा ही फैसला है,
तेरी साँसों में जीने की चाहत रखता हूँ मैं।
तू मेरी हो न हो, तुझसे मोहब्बत कम न होगी,
तेरे नाम से ही दिल को राहत रखता हूँ मैं।
© सर्वाधिकार सुरक्षित
प्रा. धन्यकुमार बिराजदार, सोलापुर
9423330737


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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