हमारे दरम्यान कुछ बाकी रह गया—
जैसे बारिश के बाद
मिट्टी में ठहरी हुई वह सौंधी-सी खुशबू,
जो जाती नहीं… बस दिल में बस जाती है।
कुछ शब्द थे,
जो होंठों तक आकर लौट गए,
कुछ भाव थे,
जो आँखों में ही ठहर गए—
और हम दोनों
समझते हुए भी,
चुप ही रहे।
कितनी ही बार लगा
कि कह दूँ सब कुछ,
पर हर बार समय ने
धीरे से कंधे पर हाथ रखकर कहा—
“अभी नहीं…”
तुम्हारे साथ बिताए वह छोटे-छोटे पल
अब स्मृतियों की धूप बनकर
मन को हल्के-हल्के छूते हैं,
और एक मीठी-सी कसक छोड़ जाते हैं।
शायद कुछ रिश्ते
पूरे होने के लिए नहीं होते,
बस महसूस करने के लिए होते हैं—
गहराई से, खामोशी से,
बिना किसी शोर के।
जो अधूरा रह गया हमारे दरम्यान,
वही आज सबसे ज्यादा अपना लगता है…
क्योंकि उसमें
न कोई अपेक्षा थी,
न कोई शिकायत—
सिर्फ एक सच्चा एहसास था।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







