लहू तो ख़ुद मरा हुआ है ज़िंदा है आदमी के शरीर में
सांसे चलती है तो दिल में हल्की सी धड़कन होती है
मगर दिल को ये ख़बर नहीं के धड़कन क्या होता है
अहसास जिसमें नहीं होता है वे मोसाईद होते हैं मगर
आँखें बहुत कुछ देखती है मगर सोच की कफियत नहीं
ख़ून जिस्म से निकल कर बह जाए तो कीमत नहीं होता
हयात में आँखें अनमोल सभी का मौत के बाद कुछ का
शरीर में फकत आँखें जो ज़ाहिर बातनी सिफत रखती है
बता दें आपको मौत के बाद कुछ आंखें सबकुछ देखती है
है कोई जावेद ज़मीन पर बुराई से पाक तो कायनात देखता है
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी ।
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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