"हमारा भारत, हमारा गौरव"
देश की आन-बान और शान के लिए,
कुर्बान है ये जान,
सारे जहां से अच्छा मेरा हिंदुस्तान,
इसकी सभ्यता-संस्कृति का,
विश्व करें गुणगान।
विश्वगुरु भारत देश सर्वश्रेष्ठ सबसे महान।
खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करती हूँ उन्हें सलाम,
ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में,
तिरंगे का नसीब बसता है ।
है सौभाग्यशाली,
मेरा गौरवमय भारत।
सुष्मा-पावन हर लफ्ज़ यहां की,
जिसमें झड़ते फूल।।
खौफ दिखाकर दुर्जन पछाड़ता,
ऐसा मृदुल मेरा देश ।
फौलाद सी सीना ताने,
अडीग रहे जहां वीर।
रहे निशानी हमेशा,
तन में।।
दिल चिर दिखा दूँ,
बस ! गौरवमय की तश्वीर को ।
प्रकृति से है देश का नाता,
सर्वोपरी जमाने से।
यहीं है मेरा भारत,
रोते को हसाने में।।
जंहा भी गिरे हिम चट्टान,
होता वहां तेरा गुणगान।
चट्टान से फटकर नरसिंह निकले,
जिससे बना देश महान।।
ऐसा सुखमय मेरा भारत,
गौरवमय भारत ।।
भारत के हम गौरव,
तारों को छू सकते हैं,
कर्मठ स्वाभिमानी हैं,
तकदीर बदल सकते हैं।
सोच किरण से तेज़ है,
मज़बूत हैं इरादे,
ख़्वाब आसमान से ऊंचा,
हम पत्थर भी पिघला दे।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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