प्यार का तो नहीं पता पऱ उसका मान जान सें ज्यादा हैं
उसका इश्क़ सर माथे पऱ,पऱ मेरी जात ही मेरी बाधा हैं
माना बगावत करदूँ उसके इश्क़ के ख़ातिर पऱ फिर भी
मेरें और उसके परिवार की इज़्ज़त भी मेरे हिस्से आता हैं
मैंने माँगा ही नहीं कभी उसका होना पऱ सम्मान माँगा हैं
बिरादरी में उसकी भी इज़्ज़त हैं ये मेरे इश्क़ सें ज्यादा हैं
मेरा सौभाग्य हैं,उसने चुना परिवार मेरा मेरी इज़्ज़त भी
सर उसके कदमो में रख दूँ, ईश्वर का अंश जैसे आधा हैं
पा तो अब भी ले बस मेरी इज़्ज़त और मान में अटका हैं
ऐसा पुरुष सर माथे पऱ जैसे इश्क़ में वो बिल्कुल राधा हैं
ज़िस्म क़ो पाना मोटा खेल नहीं ये मसला तो रूह का हैं
उसने पाया हैं रूह क़ो मेरी, और यहीं इश्क़ का धागा हैं
टूटा हुआ वो एक बेखौफ लड़का मेरे अश्क़ो सें डरता हैं
बस मेरे सम्मान के आगे हार गया,भाग्य मेरा अभागा हैं..
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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