भीड़ से निकलकर
एकांत में आने की चाह थी,
अँधेरों से निकलकर
रोशनी की तलाश में चला था।
पर…
एक भीड़
हर मोड़ पर मेरा रास्ता रोक लेती है,
न जाने कब, कहाँ से
मुझे अपनी ओर खींच लेती है।
बिना चाहत के भी
कई बार मुझे उसका हिस्सा बनना पड़ता है।
क्या
ये तलाश कभी खत्म हो पाएगी?
या अँधेरों में भटकते-भटकते
एक दिन अंधेरों में ही खो जाऊँगा…
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







