मानने के लिए तो वो मुझे बेटी मानते हैं,
मगर कभी कह दो बहु बनाने की बात तो घबरा जाते हैं,
कभी कभी खुद ही बात निकालते हैं,
फिर अपने ही बातों में हार जाते हैं,
जानकर भी अपने बेटे की खुशी,
अपनी पिछली जिंदगी पर नज़र डालते हैं,
जब निकलती है मेरी शादी की बात तो इज्जत की बात पर आ जाते हैं,
खुद कहते हैं बहुत तकलीफ़ होगी,
जब उसकी शादी होते हुए देखोगी,
और मुझसे ही लड़की ढूंढने को कहते हैं,
जानकर अपने बेटे और मेरे बारे में,
वो मुझे कभी ना डांटते हैं,
वो मुझे अपनी बेटी मानते हैं, अपनी बेटी मानते हैं...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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