बसंत,बहार लिए आए
पत्ते तेज पवन में सन-सन कर
वृक्षों से वीणा की मधुर धुन बजाएँ।
भोर में मयूर पीहूँ-पीहूँ गाए
और सबको उठाकर कहे
देखो!बसंत बहार लिए आए।
गुलाबी ठंड की चादर ओढ़े सुबह,
सूरज की स्नेहिल धूप में सौम्य प्रकाश लिए आए।
कोयल कुहूँ-कुहूँ कर मीठा गीत सुनाए
और सबको बताए
देखो!बसंत बहार लिए आए।
पीली-पीली सरसों और पीली फुलवारी,
हर तरफ़ हरियाली धरा को खूब सजाए,
आसमाँ छूती पतंगें नई उमंग जगाएँ
और सबको कहे
देखो!बसंत बहार लिए आए।
माँ सरस्वती की सब अराधना कर,
जीवन के नए अध्याय में पहला कदम बढ़ाएँ।
अज्ञानता के अंधकार को दूर कर प्रकृति ज्ञान के दीप जलाए,
नई ऊर्जा, नए उत्साह से स्वागत कर कहे
देखो!बसंत बहार लिए आए॥
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







