बस याद आती है तुम्हारी,
पर कोई आवाज़ नहीं आती,
चूर चूर हो जाती हूं मैं अब,
खलती है हमेशा कमी तुम्हारी...।।
मैं जिंदा हूँ या मर गई हूँ,
तुझे खोने के बाद मैं,
सारे सपने को तोड़ चुकी हूँ,
जब देखती हूँ चांद सितारों को,
एक तारा टिमटिमाता है,
ये तुम हो सोचकर बस मन मुस्काता है..।।
नदी का पानी बह जाता है,
मगर कल कल करती,
आवाजें उसकी वही रह जाता है,
जैसे जिस्म नहीं होते,
पर उनकी हरकतें सांसों में समा जाता है...।।
तेरी याद बस ऐसे ही आती है,
जैसे सावन में बरसात आती है,
बस कमी रहती है तेरे साथ भींगने की,
मेरी वो ख्वाहिश अब मर सी जाती है...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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