जीवन यात्रा का गंतव्य दूरस्थ,
चोटिल पद हैं रक्त से लथपथ,
नहीं कोई साथी, चले जो साथ,
चल पथिक, अकेला अपने पथ।
हिय वेदना रह गयी जो अकथ,
श्रवण हेतु नहीं कोई समीपस्थ,
वेदना का गीत अकेले गुनगुना,
चल पथिक, अकेला अपने पथ।
आसीन हो सुख-दुख जीवन रथ,
काम, क्रोध, लोभ, मोह हैं व्यर्थ,
बाँटते राह भर, प्रेम और सौहार्द,
चल पथिक, अकेला अपने पथ।
रहे स्मरण स्वयं से किया शपथ,
चलना निरंतर चाहे हो अग्निपथ,
रुकना नहीं, बस चलते जाना है,
चल पथिक, अकेला अपने पथ।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







