Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

बरखा झूम के आई रे

रंग बदरी की गहराई
बरखा झूम के आई रे
दिन में अंधियारी छाई
बरखा झूम के आई रे...

दूर गगन से आती पूरवा बूंद बूंद को छेड़े
भाती खूब है ये तन मन को पावस के थपेड़े
मन भीग भीग लहराई
बरखा झूम के आई रे......

पवन झकोरे रोम रोम को छू छू कर जब जाती है,
लगती है कि राग सुरीली,दूर कहीं से आती है
भर जाती तन अंगड़ाई
बरखा झूम के आई रे......

बुलबुल मोर पपीहा के कंठों से निकली प्रीत के गीत
निश्छल चंचल कोमल मन में घुलती जाती है संगीत
अब तो हरियली मुस्कायी
बरखा झूम के आई रे......

लंबे समय से ग्रीष्म जलन की टूट गई मनमानी
सूरज की तपती धूप भी अब हो गई पानी पानी
घर घर चैन समाई
बरखा झूम के आई रे.....

कागज की नन्ही नावों का निकल चला है रेला
मन में सज गई है बचपन की यादों का वो मेला
गलियों में रौनक आई
बरखा झूम के आई रे....


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

+

Lekhram Yadav said

बारिश के आगमन पर बहुत खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार

अनिल भारद्वाज एडवोकेट said

वाह वाह वाह आपकी रचना को सुनकर बरखा रानी झूमती हुई आ गई। बेहतरीन रचना। कागज की नावों का रेला, जलन की टूट गई मनमानी, तपती धूप हो गई पानी । वाह वाह क्या बात है। बहुत बढ़िया प्रतीकों की संरचना की है आपने। सादर अभिवादन।

सुभाष कुमार यादव said

क्या सुंदर चित्रण किया है वर्षा रानी का आपने समदिल सर। बेहतरीन।👌👌🙏🙏

कृष्णा शर्मा said

बरखा रानी का बहुत ही खूबसूरती के साथ चित्रण किया हैं आपने 👏👏👏
बहुत ही खूबसूरत रचना 👏👏👏
सादर प्रणाम 🙏😊

सुप्रिया साहू said

वाह वाह....बरखा की स्वागत बहुत ही खूबसूरत अंदाज से किया है आपने, बरखा के आने से तन मन, धरती गगन, नदी तालाब, प्रकृति भी झूमने नाचने लग गई है, बच्चों ने भी अब कागज से नाव बनकर खेलना शुरू कर दिया है, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌🏻👌🏻, आपको सादर प्रणाम 🙏🏻🙏🏻।

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन