बैठा मौन हूँ मगर फिल्म तुम्हारी चल रही।
तरह-तरह के भाव से तबियत मचल रही।।
खिलखिलाती हँसी कानो में गुंजी जब से।
देखना चाहता दिल को हलचल खल रही।।
घर के बाहर खेलना शुरू करने से पहले।
ख्याल आ जाता मोहब्बत की पहल रही।।
दूर होती नही खुमारी उजाला कम हो रहा।
असमंजस वहीं घड़ी की सूइयां बदल रही।।
उस चौखट तक मसला ज्यों का त्यों रहा।
दस्तक देने की समस्या 'उपदेश' अटल रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







