रेत में बनाए घरौंदे जल मग्न हो गए।
ख्वाब अधूरे ही रहे सब दागी हो गए।।
तुम्हारा साथ पाकर भी खुश नही मन।
भंवर में फंसे हम जब से बागी हो गए।।
जितना यौवन पाया उतना बचपन गया।
कैसी हवा लगी हमको बैरागी हो गए।।
वक्त के पहले पके मन कचपन ही रहा।
'उपदेश' प्रियबचनो के अनुरागी हो गए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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