बाप मना नहीं करता ,
बेटी को ऊँची उड़ानों से,
वह तो बस काँप उठता है
जब याद आता है—
आसमान में बाज़ बहुत हैं।
वह जानता है,
उसकी बेटी के पंखों में
हौसलों का सूरज बसता है,
वह बादलों से बातें कर सकती है,
क्षितिज से आगे भी अपना नाम लिख सकती है।
पर दुनिया...
दुनिया हर उड़ान की साथी नहीं होती,
कुछ नज़रें दुआ नहीं देतीं,
कुछ आँखें सिर्फ़ शिकार तलाशती हैं।
इसलिए जब वह कहता है—
"ज़रा संभलकर जाना..."
तो वह उसके सपनों की डोर नहीं खींचता,
बस हवाओं की चाल पहचानने को कहता है।
उसकी डाँट में
सदियों की चिंता छिपी होती है,
उसकी खामोशी में
अनगिनत दुआएँ पलती हैं।
वह चाहता है—
बेटी चाँद तक जाए,
अपने नाम से आकाश रौशन करे,
पर लौटे भी
वैसी ही मुस्कान लेकर,
जैसी छोड़कर गई थी।
बेटी,
उड़ना तुम्हारा अधिकार है,
आसमान तुम्हारी मंज़िल है,
बस इतना याद रखना—
ऊँचाई जितनी बढ़ती है,
सावधानी भी उतनी ही ज़रूरी होती है,
क्योंकि,
आसमान में बाज़ बहुत हैं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







